संकल्पना-पुस्तकें, भाग १
भारत की वर्णमाला
बच्चों के लिए एक सनातन वर्णमाला-पुस्तक, पूरे बावन वर्ण
लेखक: शाश्वत सनातन
एक दृष्टि में
- आयु
- ३–६ वर्ष
- पृष्ठ
- ६८
- श्रृंखला
- संकल्पना-पुस्तकें, भाग १
- भाषा
- हिन्दी
- प्रारूप
- पेपरबैक · किण्डल ई-पुस्तक · Google Play ई-पुस्तक
यह पुस्तक शीघ्र Amazon और Google Play पर आएगी।
इस पुस्तक के बारे में
अ से अनार नहीं। अ से अर्जुन।
अधिकांश वर्णमाला-पुस्तकें बच्चे को यह सिखाती हैं कि संसार अनार, आम और बिल्ली से आरम्भ होता है। यह पुस्तक धीरे से एक भिन्न आरम्भ देती है, अपनी ही सभ्यता के अक्षरों से।
और यहाँ पूरे बावन वर्ण हैं। जो छह वर्ण प्रायः किसी शब्द के आरम्भ में नहीं आते (ङ, ञ, ण, ष, ड़, ढ़), उन्हें भी छोड़ा नहीं गया; प्रत्येक को अपना पूरा पन्ना मिला है, उस शब्द के साथ जिसके भीतर वह रहता है: गङ्गा, पञ्चतन्त्र, रामायण, शेषनाग, घड़ा, पढ़ना।
इस पुस्तक में:
- ५२ चित्रित पन्ने, प्रत्येक वर्ण के लिए एक
- प्रत्येक पन्ने पर ऊँचे स्वर में पढ़ने योग्य एक छोटी पंक्ति और एक "तुम्हें पता है?"
- महाभारत, रामायण, वेद और जीवित परम्परा से लिए गए प्रामाणिक नाम, कभी साम्प्रदायिक नहीं
- पूरी वर्णमाला एक ही पन्ने पर, सन्दर्भ-तालिका
- माता-पिता के लिए एक पूरा पन्ना
आयु ३–६ के लिए, पर दादा-दादी इसे उतने ही चाव से पढ़कर सुनाएँगे जितने चाव से बच्चे सुनेंगे।
चित्र डिजिटल साधनों से, जिनमें कृत्रिम बुद्धि (AI) भी सम्मिलित है, बनाए गए और फिर सावधानी से चुने और सँवारे गए हैं।