पाँच अङ्ग
- वार
- मङ्गलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 17:10 तक, तत्पश्चात् कृष्ण चतुर्थी 30 सितंबर 14:55 तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 09:04 तक, तत्पश्चात् भरणी 30 सितंबर 07:37 तक
- योग
- व्याघात 06:14 तक, तत्पश्चात् हर्षण 30 सितंबर 03:21 तक, तत्पश्चात् वज्र 1 अक्टूबर 00:21 तक
- करण
- वणिज 06:14 तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा) 17:10 तक, तत्पश्चात् बव 30 सितंबर 04:04 तक, तत्पश्चात् बालव 30 सितंबर 14:55 तक
सूर्य और चन्द्रमा
- सूर्योदय
- 06:13
- सूर्यास्त
- 18:10
- चन्द्रोदय
- 19:44
- चन्द्रास्त
- 08:40
- सूर्य राशि
- कन्या
- चन्द्र राशि (सूर्योदय पर)
- मेष
शुभ और अशुभ काल
- राहुकाल
- 15:10 – 16:40
- यमगण्ड
- 09:12 – 10:42
- गुलिक काल
- 12:11 – 13:41
- अभिजित् मुहूर्त
- 11:47 – 12:35
मास, संवत् और पर्व
- मास (पूर्णिमान्त)
- आश्विन
- मास (अमान्त)
- भाद्रपद
- विक्रम संवत्
- 2083
- व्रत एवं पर्व
- संकष्टी चतुर्थी
पञ्चाङ्ग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। प्रत्येक अङ्ग सूर्योदय पर प्रचलित मान से आरम्भ होता है।
व्रत और पर्व यहाँ केवल तिथि के आधार पर दिए गए हैं। बड़े व्रतों के निर्णय में स्थानीय परम्परा और शास्त्रीय नियम भी देखे जाते हैं, इसलिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।