पाँच अङ्ग
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- तिथि
- कृष्ण पञ्चमी 12:35 तक, तत्पश्चात् कृष्ण षष्ठी 2 अक्टूबर 10:15 तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 2 अक्टूबर 04:27 तक, तत्पश्चात् मृगशिरा 3 अक्टूबर 02:55 तक
- योग
- सिद्धि 21:19 तक, तत्पश्चात् व्यतीपात 2 अक्टूबर 18:18 तक
- करण
- तैतिल 12:35 तक, तत्पश्चात् गर 23:25 तक, तत्पश्चात् वणिज 2 अक्टूबर 10:15 तक
सूर्य और चन्द्रमा
- सूर्योदय
- 06:14
- सूर्यास्त
- 18:07
- चन्द्रोदय
- 21:24
- चन्द्रास्त
- 10:57
- सूर्य राशि
- कन्या
- चन्द्र राशि (सूर्योदय पर)
- वृषभ
शुभ और अशुभ काल
- राहुकाल
- 13:40 – 15:09
- यमगण्ड
- 06:14 – 07:43
- गुलिक काल
- 09:12 – 10:42
- अभिजित् मुहूर्त
- 11:47 – 12:34
मास, संवत् और पर्व
- मास (पूर्णिमान्त)
- आश्विन
- मास (अमान्त)
- भाद्रपद
- विक्रम संवत्
- 2083
- व्रत एवं पर्व
- नहीं
पञ्चाङ्ग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। प्रत्येक अङ्ग सूर्योदय पर प्रचलित मान से आरम्भ होता है।
व्रत और पर्व यहाँ केवल तिथि के आधार पर दिए गए हैं। बड़े व्रतों के निर्णय में स्थानीय परम्परा और शास्त्रीय नियम भी देखे जाते हैं, इसलिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।